वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वॉशिंगटन स्थित यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने शुक्रवार को जोरदार झटका दिया। अपील्स कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ अवैध हैं। कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने आपातकालीन ताकत का हवाला देकर जो टैरिफ लगाए, वे उनके अधिकार से आगे के कदम हैं। कोर्ट ने कहा कि कानून ये शक्ति अमेरिका के राष्ट्रपति को देता है कि वो आपातकाल के तहत कई कदम उठा सकते हैं, लेकिन इसमें टैरिफ या टैक्स लगाने की शक्ति नहीं है। कोर्ट ने फैसले में ट्रंप की ओर से लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ के साथ ही चीन, मेक्सिको और कनाडा पर लगाए कुछ टैक्स को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस (संसद) ने कभी भी राष्ट्रपति को असीमित टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं दी। ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ पांच छोटे अमेरिकी कारोबारियों और डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 12 राज्यों ने याचिका दाखिल की थी। याचिकाओं में कहा गया था कि अमेरिका के संविधान के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ अमेरिका की संसद के पास है। राष्ट्रपति को ऐसा कोई अधिकार नहीं मिला है। कोर्ट ने टैरिफ के खिलाफ फैसला तो सुना दिया है, लेकिन इसे अक्टूबर 2025 तक मुल्तवी रखा है। ताकि ट्रंप प्रशासन फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सके। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने कोर्ट के फैसले पर कहा कि टैरिफ लागू हैं और सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती देंगे। ट्रंप ने टैरिफ पर कोर्ट के फैसले को पक्षपाती बताया। उन्होंने कहा कि टैरिफ हटाना पूरी आपदा होगी। जिससे अमेरिका आर्थिक तौर पर कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका बड़ा व्यापार घाटा और दूसरे देशों की अनुचित नीतियों को सहन नहीं करेगा।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल 2025 में देश के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी IEEPA के तहत ज्यादातर देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था। फिर इसे 90 दिन के लिए सस्पेंड किया था। समयसीमा गुजरने के बाद जिन देशों ने अमेरिका से व्यापार समझौता किया, उन पर ट्रंप ने टैरिफ घटाया, लेकिन भारत और ब्राजील पर 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया। इसके बाद ट्रंप ने रूस से कच्चा तेल और हथियार खरीदने का आरोप लगाकर भारत पर और 25 फीसदी पेनाल्टी लगा दी। जबकि, ब्राजील पर भी टैरिफ को बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया। ट्रंप से पहले अमेरिका के किसी भी राष्ट्रपति ने दूसरे देशों पर टैरिफ नहीं लगाया था। ट्रंप के टैरिफ का भारत और चीन समेत कई देशों ने विरोध किया है। भारत ने साफ कहा है कि वो अपने किसानों, मछुआरों और डेयरी उत्पादकों के हित से समझौता नहीं करेगा। साथ ही भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद भी जारी रखी हुई है।
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